Jalandhar : न्यूजीलैंड में 29 जनवरी 2024 को लुधियाना के गुरजीत की जालंधर के रजिंदर सिंह ने ताबड़तोड़ चाकू मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में कोर्ट में 2 साल तक चले केस के बाद कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दरअसल, 2 साल पहले रजिंदर सिंह ने गुरजीत सिंह के घर में घुसकर उस पर चाकू से 46 वार करके उसकी हत्या की थी। राजिंदर सिंह ने गुरजीत के गले पर इतने वार किए कि उसका सिर धड़ से अलग होने वाला था।
अदालत में 2 साल केस चलने के बाद आखिरकार गुरजीत के परिवार को न्याय मिल गया और हत्यारे को 17.5 साल जेल में रहना होगा। इस दौरान उसे पैरोल भी नहीं दी जाएगी। रजिंदर सिंह न्यूजीलैंड में एक फाइबर-ऑप्टिक केबल टेक्नीशियन के रूप में काम करता था। वह एक तरह से गुरजीत का पूर्व बॉस या सीनियर सहकर्मी भी रह चुका था। गुरजीत भी इसी क्षेत्र में काम करता था। शुरुआत में उसने रजिंदर के अधीन काम किया था, लेकिन बाद में उन्होंने अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर दिया था।
वह केबल बिछाने और तकनीकी सेवाओं का काम करता था। कोर्ट की कार्यवाही के दौरान यह सामने आया कि रजिंदर और गुरजीत के बीच तनाव का मुख्य कारण कोई काम नहीं, बल्कि शादी का प्रस्ताव था। रजिंदर, गुरजीत की पत्नी से शादी करना चाहता था। परिवार ने उनका रिश्ता तय भी कर दिया था। लेकिन उसने रजिंदर के साथ रिश्ता ठुकरा दिया और रजिंदर के जूनियर रहे गुरजीत से शादी कर ली थी। इन्हीं व्यक्तिगत रंजिशों के कारण राजिंदर ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। गुरजीत सिंह की शादी हत्या से 8 महीने पहले हुई थी।
डिटेक्टिव सीनियर सार्जेंट निक लेघ ने सजा सुनाए जाने से पहले मीडिया को बताया कि गुरजीत सिंह “अपनी पत्नी के साथ एक नया जीवन शुरू करने वाले थे, जो उनकी हत्या के एक हफ्ते बाद ही न्यूजीलैंड आने वाली थी। जस्टिस डनिंगहम ने राजिंदर को पीड़ित के परिवार और विधवा को $8,000 से अधिक का भुगतान करने का भी आदेश दिया है। गुरजीत की उम्र तब 27 साल थी और वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था।
गुरजीत सिंह के पिता निशान सिंह ने न्यूजीलैंड कोर्ट के फैसले के बाद कहा कि आखिर कार उन्हें अंतिम न्याय मिल गया। अब उनके बेटे की आत्मा का शांति मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरे मुकदमे के दौरान उनके लिए यह बहुत कठिन समय था। खासकर मां के लिए क्योंकि उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है। राजिंदर सिंह को पकड़ने में सीसीटीवी फुटेज की बड़ी भूमिका रही। पुलिस ने आरोपी की कार को घटना की रात गुरजीत के घर के पास देखा था।
हालांकि उसने चेहरा छिपाने की कोशिश की थी, लेकिन तकनीक की मदद से उसे पहचाना गया। गुरजीत सिंह ने अपनी जान बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। संघर्ष के दौरान आरोपी का डीएनए गुरजीत के नाखूनों और कपड़ों पर मिला, जो अदालत में सबसे ठोस सबूत बना। पुलिस को वह चाकू कभी नहीं मिला जिससे हत्या की गई थी, लेकिन घावों की गहराई और प्रकृति से यह साफ था कि हमला बहुत ही हिंसक और क्रूर था।
