पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले कार्यकर्ता परविंदर झोटा की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना ने कानून-व्यवस्था और नशे के खिलाफ चल रही मुहिम को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस सनसनीखेज वारदात पर एंटी करप्शन एंटी क्राइम ऑर्गेनाइजेशन (रजि.) की प्रमुख मंजू अरोड़ा ने कड़ा रोष जताते हुए इसे बेहद शर्मनाक और चिंताजनक बताया है।
मंजू अरोड़ा ने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाना समाज के हित में है, लेकिन अगर ऐसे लोगों को ही अपनी जान गंवानी पड़े, तो यह बेहद गंभीर स्थिति है। परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने न केवल उनके परिवार को गहरा सदमा दिया है, बल्कि नशे के खिलाफ संघर्ष कर रहे लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे गंभीर सवाल उस लाइव वीडियो को लेकर उठ रहे हैं, जिसमें परविंदर सिंह झोटा कथित तौर पर पुलिस को मौके पर पहुंचने के लिए कहते दिखाई दिए। जानकारी के अनुसार, मेडिकल स्टोर संचालक के साथ विवाद के दौरान उन पर गोलियां चलाई गईं और उनकी जान चली गई।
मंजू अरोड़ा ने इस घटना से जुड़े उस पहलू पर भी गंभीर चिंता जताई कि कथित तौर पर गोलियां चलाने के बाद भी आरोपी हथियार लेकर बाजार में घूमता रहा और लोगों के बीच दहशत का माहौल बना रहा। जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।
मंजू अरोड़ा ने इस घटनाक्रम को पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली से जुड़ा गंभीर मामला बताया। सवाल यह है कि पुलिस को सूचना कब मिली? क्या समय रहते कार्रवाई की जा सकती थी? यदि पुलिस से मदद मांगी गई थी, तो घटनास्थल पर सहायता पहुंचने में कितना समय लगा?
इन सवालों का जवाब जांच के जरिए सामने आना चाहिए। लाइव वीडियो और पुलिस को दी गई सूचना की समय-सीमा की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ और कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई।
मंजू अरोड़ा ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। अगर कोई व्यक्ति नशे से जुड़ी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर उसे सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस हत्याकांड ने एक बार फिर पंजाब में नशे की समस्या और उससे जुड़े मामलों पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता को सामने ला दिया है। नशे के खिलाफ अभियान तभी मजबूत होगा, जब शिकायत करने वालों को भरोसा हो कि प्रशासन उनकी बात सुनेगा और कानून के तहत कार्रवाई करेगा।
मंजू अरोड़ा ने मांग की कि परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए। आरोपी के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई हो तथा पुलिस की भूमिका की भी जांच की जाए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
