हिमाचल प्रदेश में बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों, रेहड़ी-फड़ी वालों और अन्य कामगारों के लिए पुलिस वेरिफिकेशन (चरित्र प्रमाण पत्र) अनिवार्य किए जाने की व्यवस्था के बाद अब पंजाब में भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
एंटी करप्शन एंटी क्राइम ऑर्गेनाइजेशन (रजि.) की प्रमुख मंजू अरोड़ा ने पंजाब सरकार से मांग की है कि बाहर से पंजाब आकर रहने, काम करने या रोजगार करने वाले लोगों की उचित पुलिस वेरिफिकेशन की व्यवस्था को गंभीरता से लागू किया जाए।
उन्होंने कहा कि पंजाब में रोज़गार की तलाश में अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इनमें बड़ी संख्या मेहनती, ईमानदार और शांतिपूर्ण लोगों की है, जो वर्षों से पंजाब में रहकर अपना रोजगार कर रहे हैं। लेकिन समय-समय पर बाहर से आए कुछ लोगों के आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के मामले भी सामने आते हैं। ऐसे मामलों को देखते हुए प्रशासन के पास उनकी पहचान और पृष्ठभूमि की सही जानकारी होना जरूरी है।
मंजू अरोड़ा ने कहा कि पुलिस वेरिफिकेशन का उद्देश्य किसी समुदाय या राज्य विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पंजाब की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होना चाहिए। जो व्यक्ति ईमानदारी से मेहनत करके रह रहा है, उसे किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए, लेकिन अपराधी प्रवृत्ति वाले लोगों की पहचान समय रहते होना जरूरी है।
उन्होंने पंजाब सरकार से मांग की कि प्रवासी मजदूरों, रेहड़ी-फड़ी वालों, किराएदारों, घरेलू कामगारों और अन्य राज्यों से आकर पंजाब में लंबे समय तक रहने या रोजगार करने वाले लोगों के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी वेरिफिकेशन व्यवस्था बनाई जाए।
“पंजाब सभी मेहनतकश लोगों का स्वागत करता है, लेकिन पंजाब की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। अच्छे लोगों का सम्मान और अपराधियों पर कानून का शिकंजा—यही व्यवस्था होनी चाहिए।” — मंजू अरोड़ा
